मेरा शुभ हो
Past writes future. भविष्य की नींव जब पड़ ही चुकी है तो वर्तमान में मेहनत क्यों करनी?
यह समझने के लिए कर्म और श्रम में अंतर समझना जरूरी है। श्रम करने के लिए ऊर्जा चाहिए होती है। शक्ति और ऊर्जा भिन्न है। शक्ति चाहिये कर्म के प्रति भक्ति रखने के लिए। अपने कर्मफल जो कमाए हुए है, वो हमें मिलता अवश्य है।
कर्म यानी बुद्धि ने जिस दिशा में निर्णय लिया, उसी के अनुसार कर्मफल निर्धारित हो जाता है। हर कर्म के लिए कर्मफल निश्चित होता है। श्रमफल vary करता है situation के अनुसार।
जितना भी confusion फैला हुआ है, सिर्फ इसी कारण से, कि यह मानना नही चाहते कि कर्म का निश्चित कर्मफल है, और श्रम और कर्म में अंतर है।
राजा दशरथ को confusion हुआ कि कोई जानवर है, और तुरन्त तीर चला दिया। श्रवण कुमार मारे गए। उनके रोते हुए माता पिता ने श्राप दिया दशरथ को, तुम भी पुत्र मोह में मरोगे। तब तक राजा दशरथ के कोई पुत्र नही था।
पुत्र आया, फिर वन को गया, और दशरथ पुत्र मोह में मरे।
आज का युवा वर्ग यही प्रश्न उठाता है, कि कोई भी effort क्यों करना, जब destiny पहले ही लिखी गयी है। जीवन को बिना कष्ट के बिताना है, तो ज्ञान कमाना होगा। ज्ञान सुनकर, खरीदकर नही आ सकता। जैसे स्कूल जाते है, धन कमाना सीखने के लिए। ऐसे ही effort करने है ज्ञान कमाना सीखने के लिए।
धन कमाया जाता है शरीर को पालने के लिए। शरीर बीमार करके धन कमाया, तो क्या लाभ हुआ। दिशा निर्धारण जरूरी है,कष्टमुक्त जीवन के लिए। श्रम करने के लिए effeciency चाहिए। कर्म करने के लिए दिशा ज्ञान।
खुद को dustbin नही बनने देना। जीवन मे क्या चाहिए, क्या नही, ये हमे decide करना आना चाहिए। मनुष्य योनि बहुत मुश्किल से कमाई जाती है। मेरा शुभ हो, यह हर क्षण याद रखना है।
गीता में भी श्रीकृष्ण ने यही बताया कि योग्यता अपनी बढ़ाओगे तो गुरु स्वयम आएंगे आपको ज्ञान देने। अपने लिए suitable दिशा समझनी बहुत जरूरी है, जो कि बहुत मुश्किल से मिलती है। ज्ञान सस्ता या मामूली नही हो सकता।
रावण ने गुरु को पहचान कर ज्ञान खरीद लिया था। तुरंत ही अपना सिर काट कर गुरु के चरणों मे रख दिया। गुरु ने ज्ञान तो दिया, लेकिन उसे use नही कर पाए रावण। यह बात कुच्छल दोहे में बतायी गयी है। कुच्छल उस community को कहा गया जो हर तरह के छल को कुचलने के काम करते हैं। महाराजा अग्रसेन के ही एक गोत्र हुए है कुच्छल। कृष्ण का जन्म भी कुच्छल गोत्र में हुआ था।
आज की कृश्नांश कथा यहाँ सुनें
https://youtu.be/vvQSUUKNKY4
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