निश्छलिस्म
प्रार्थना करके अपने molecules (तत्वों) को balance में लाया जाता है। प्राणी 24 molecules से बनता है। 5 तत्वों से शरीर को समझना मुश्किल है। सनातन संस्कृति और सनातन धर्म अलग अलग है। धर्म यानी religion हमेशा region based होता है। जहाँ जैसे हालात है, वैसी ही परंपरा निभाई जाती है। religion अगर expansion करना चाहेगा तो खत्म हो जाएगा।
देश और राष्ट्र भी अलग अलग concepts हैं। अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठा रखनी जरूरी है। देश यानी वो स्थान जहाँ आपका जन्म हुआ है, आप पले बढ़े हैं। प्रकृति का नियम है कि कन्या की जड़ें उसके पति से जुड़ जाती है। इसीलिए परम्परा बनाई गई कि कन्या अपने पति के स्थान पर रहती है, विवाह के बाद। किसी भी कार्य के best results मिलते हैं, जब अपनी जड़ों से जुड़े रहकर उस कार्य को किया जाए। देश ही होता है अपना region और उसी से set होता है अपना religion।
निश्छलिस्म universal religion है। यानी कि practical सनातनता। मनुष्य का धर्म, जन्म से पहले और मृत्यु के बाद एक ही होता है, निश्छलिस्म।
निश्छलिस्म बताता है Art of Leaving। आपको पता होना चाहिए कि आपको क्या छोड़ना है, कैसे छोड़ना है। नवजात शिशु कहलाता है कुटुम्ब का गुरु। क्योंकि सिखाता है Art of leaving सभी को।
Universal नियम सभी के लिए समान हैं। जो कि वेदों में बताए गए। उन्हें समझना ही एक choice है, क्योंकि नियम बदले नही जा सकते।
हवा, सूर्य सभी के लिए समान है। हवा की ऊर्जसरोत हैं कृश्नांश भगवान। प्राणी के 24 molecules में से एक molecule का नाम भी कृश्नांश है। अपने कृश्नांश molecule को activate और maintain करके अपना गुरु स्वयम बनना possible हो जाता है।
योग & योगा के procedures 24 molecules को बैलेंस में लाने के लिए बहुत कारगर हैं। श्वास सभी के लिए universal है, इसलिए इन procedures को follow किया जाता है निश्छलिस्म के पथ पर चलने के लिए।
निष्छल यानी जो अपने आप को दूसरों के छल से बचाना जानता हो। Universal facts कभी नही बदलते, कोई माने या ना माने यह personal choice है। कृष्णईष्ट भगवान हुए कृष्ण के ईष्ट। यही fact है। कोई माने या ना माने, यह fact नही बदलेगा।
आपकी श्वास, या heartbeat में disturbace बीमारी ही लाएगी, यह universal नियम है। नियमो को मानना हरेक के लिए cumpolsory है,इन कोरोना काल ने हमे बताया।
जीवन मे चिंताओं और कष्टो को एक हिस्सा मान लिया है 90 प्रतिशत लोगो ने। confusion इसे ही कहते है कि जीवन को utilise करना नही आना।
मनुष्य योनि योग योनि है, means जुड़ना सीख सकते हैं मनुष्य होकर। अपने लिए दिशा निर्धारित कर सकते है । नियम जानकर,और अपनी प्रकृति को समझकर ही दिशा तय की जा सकती है। सनातन संस्कृति यही बताती है कि कर्म करने से पहले आपको पता होना चाहिए कि आपको इसका क्या कर्मफल मिलेगा। यही जानने के लिए योग्यता चाहिए। Art of Leaving से आती है योग्यता।
श्वासयोग बेहतरीन तरीका है योग्यता बढाने का।
इस लिंक से कृश्नांश कथा सुनी जा सकती है
https://youtu.be/9ycE_HszDiA
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